Sunday, October 26, 2008

ये तड़प


सोचा न था यूं तड़पेंगे हम दोनों इस कदर
तेरी आवाज़ सुनने को तडपा हूँ जिस कदर !!
आज ये हालत जो हम पर बने हैं यूं
मिलना चाहे भी तो मिल नहीं पाते हैं क्यूँ !!
जालिम ज़माने को क्या समझाए हम
बिछुड़ने का ना हम सह पाएंगे यूं गम !!
कुछ कर इस तरह की मिल पाए हम
जिंदगी है थोडी अब और न सह पाएंगे गम !!