Sunday, October 12, 2008

दर्द का एह्साह


तेरे दर्द का एह्साह मुझे होता है
कांटा तुझे चुभे दर्द मुझे होता है !!
तेरी आँख मे गर आंसू हो तो
दिल् मेरा ज़ार ज़ार रोता है !!
दूरी का एहसास हुआ तो पता चला
जिसे प्यार कहते थे वो प्यार क्या होता है!!
आज मेरे दिल् की तड़प ने समझा दिया
बिछुड़ने से दिल् का हाल क्या होता है !!
न दिन को चैन न आराम रातों को मुझे
मेरा हाल क्या है अब क्या बताऊँ तुझे !!
मेरे बिन बताये भी सब जानती है तूं
तुझसे बिछुड़ कर कब तक जिऊँगा यूं !!
अब समझ और पहचान हालातों को
प्यार को समझ और समझ मेरी बातों को !!