जाने वाले तेरा शुक्रिया आने वाले तुझे सलाम है !! जो बीत गया वो सपना था जो आ रहा वो नया साल है !! खुदा करे सब खुशिया बांटे मेरी यही दुआ हर बार है !! छोडो पिछली बातें सारी नए का स्वागत अब करना है !! आओ मिल कर बैठे सोचें अब क्या क्या अच्छा करना है !!
कियूं रखूं अपनी कलम मे स्याही मैं जब कोई अरमान दिल मे मचलता नहीं!! नहीं जानता मै कियूं शक करते हैं सब मुझ पर जब मेरी किताब मै कोई सुखा फूल ही नहीं !! प्यार तो बहुत करता हूँ उसको मैं पर क्या करुँ यह पत्थर दिल है की पिघलता ही नहीं !! जो खुदा मिले तो उस से अपना प्यार मांगूं पर सूना है की वो किसी से मिलता ही नहीं !!
चाँद को पाने की तम्मना कर बैठे हम दिल देकर जिंदगी का सौदा कर बैठे हम !! उनको पाया तो लगा चाँद को पा लिया वो रूठे तो लगा जिंदगी खो बैठे हम !! वो समझते रहे मज़ाक जिस बात को उस को निभाने मे खुद को भी खो बैठे हम !! आज निकले है खुद की तलाश मे ऐ खुदा दिखाना रास्ता वर्ना फिर से भटक जायेंगे ये कदम !!
हकीक़त महज़ खेल होती जिस्मो का अगर तो दुनियां आज भुला देती नाम आशिकों के !! आँखों से गिरे ये आंसू तेरे प्यार की निशानी है तूं समझे तो शबनम, न समझे तो छींटे पानी के !! किसी को मिल जाती है रंगीन बहारें यहाँ किसी को नसीब नहीं होते नज़ारे चमन के !! किसी की कब्र पे बनता ताज महल यहाँ किसी को नसीब नहीं होते टुकड़े कफ़न के !!
बहुत याद आती हैं यार की बातें जब कभी चलती है प्यार की बातें !! खूबसूरत फूलों की याद आती है जब कोई करता है बहार की बातें !! झांजर झुमके काजल और लाली सब मिल के रचते श्रृंगार की बातें !! आँखों मे शर्म लबों पे कम्पन उफ़ ये उनके इज़हार की बातें !! भुला दो इस ज़माने को आज आओ करें मुहब्बत प्यार की बातें !!
आज फिर खुदा ने पूछा मुझे कि तेरा हसता हुआ चेहरा उदास क्यों है !! इन भीगी हूई आँखों मे इतनी तड़प और प्यास क्यों है !! जिनकी नज़रों मे तूं कुछ भी नहीं वो तेरे लिए इतना ख़ास क्यों है !! मैंने हस्ते हुए कहा खुदा से गर प्यार नहीं रब तो मेरे लिए वो भी परेशान क्यों है !!
कहीं अकेला न मर जाऊँ कोई दे जा याद सिन्धुरी तुझे बिन देखे रह नहीं सकता, है मेरे नैनो की मजबूरी!! तूं लाख कोशिश कर ले बन नींद तेरी आँखों मे रहूंगा आसानी से नहीं भूलेगी तूं तेरी धड़कन बन के धड्कुंगा!! तेरे बिन मै न जी पाउँगा ये मुझे भी है पता जानती है तूं भी न पा सका तुझे तो मर जाऊंगा जिंदगी बेमतलब थी यूं भी !!
एक मुद्दत हो गयी एक दूजे से दूर थे हम तुम एक ज़माने के बाद यूं मिलना अच्छा लगा !! सागर की गहरायी जैसा लगा प्यार तुमारा तैरना आता नहीं था पर डूबना अच्छा लगा !! तेरे बिन जीना दूभर और मरना भी मुश्किल तेरा साथ पाकर जिंदगी का हर लम्हा जन्नत लगा !! लोग पूछेंगे हमारी मुहब्बत के बारे मे अगर नंगे पाँव रेत पर हमे चलना अच्छा लगा !!
जहा देखो हम ही हम हैं
हम ही हम हैं तो क्या हम हैं
जो देखा उसके दिल् मैं तो
मेरे लिए क्या मुहब्बत कम है
यूँ ग़लतफहमी मे जिए कब तक
और ख़ुद पर ज़ुल्म ढाए कब तक
जीना दुश्वार सा लगने लगा है
हमे अब ख़ुद से डर लगने लगा है
ख़ुद से भी डरें तो कब तक
इतना ज़ुल्म ढाए तो कब तक
क्योंकी.......
हम ही हम हैं तो क्या हम हैं